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उजाले कहाँ , हर किसी को...

उजाले  कहाँ , हर किसी को रास आते है ।

वो देखो उल्लुओं को....!

जो सूरज के आते ही , उदास हो जाते है ।।

ज्योति प्रसाद रतूड़ी.....✍️

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