रूपसी तू मेरी माया मोहनी ,
तू मेरी जुकूड़ि कु धक्ध्याट छैं ।
लुकि छुपीक कीलें छैं , धै लाणि तू ।
सैन्दीक औ दें म्यरा समाणि , हे लठ्याली !
तू ही मेरी ,आन्खियों कु रगर्याट छै ।
✍️ज्योति प्रसाद रतुड़ी
रूपसी तू मेरी माया मोहनी ,
तू मेरी जुकूड़ि कु धक्ध्याट छैं ।
लुकि छुपीक कीलें छैं , धै लाणि तू ।
सैन्दीक औ दें म्यरा समाणि , हे लठ्याली !
तू ही मेरी ,आन्खियों कु रगर्याट छै ।
✍️ज्योति प्रसाद रतुड़ी
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