तू गुल्लक बनकर , मेरे दिल का । दिसंबर 05, 2021 तू गुल्लक बन कर, मेरे दिल का ।रखना मुझे , सम्भाल कर ।हम दिल के बहुत खुले है , कहीं भी बिखर जाते है ।ज्योति प्रसाद रतूड़ी.......✍️ शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप शेयर करें लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ
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