रूठे हुए है आज न जाने क्यों वो ?
जो मेरे आंखों में कभी , ख्वाब बनकर रहते थे ।
ख्वाब ही तो थे , कब किसके हुए ।
चलो अच्छा ही हुआ चले गए ।
अब नहीं है तसव्वुर में मेरे , उनका अक्स ।
बे फिक्र सा हुआ दिल अब , कुछ हल्का हल्का सा हुआ ।
अब दिल ने तोबा कर ली लागी से , और कहे अब आगे नहीं, और अब बस ।
✍️ज्योति प्रसाद रतुड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें