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एक वहम पाला था मैने...

 एक वहम पाला था मैने कि , 

बदल गए है वो अब ।

हमारा ख्याल हमारे जज्बात का , 

उनको होने लगा है एहसास अब ।

देखा जो आज उनको किसी गैर से , 

छुप छुप के बतलाते मुस्कुराते ।

हमारे पास जाते , हमीं पर चिल्लाते ।

वो वहम आज , दिल से दूर हो गया ।।

अब तो नफरत सी हो गई है , 

मोहब्बत के नाम से ।

दगा बाज है वो ही जो कसम खाते थे कभी , 

वफ़ा के नाम से ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी (मलंग)

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