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तू इतना बदल जाएगा , यह इल्म न था ।

 तू इतना बदल जाएगा , यह इल्म न था ।


तेरी वफ़ा के हम चर्चा , आम किया करते थे ।


ना जाने नज़र किसकी लगी कि , 

तुम पास होकर भी हमसे दूर हो गए ।


अब तो तरस गई है मेरी ये निगाहें , 

तुमसे नजरें  मिलने को । 


काश के तू देख ले इक बार पलट कर , 

और हमें करार आ जाए ।


सहे है हमने सितम तुम्हारे , ऐ सितमगर !


रोए है घुट घुट कर , हम हर रात भर ।


फिर भी रहा लबों पर , नाम तेरा । 


तू ज़फा कर कोई गम नहीं, 

मगर मेरी वफ़ा पर इल्ज़ाम न कर ।


तू इतना बदल जाएगा , यह इल्म न था ।


तेरी वफ़ा के हम चर्चा , आम किया करते थे ।


ना जाने नज़र किसकी लगी कि , 

तुम पास होकर भी हमसे दूर हो गए ।


✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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