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वक्त वक्त की बात है तब और अब ।


वक्त वक्त की बात है तब और अब ।

समय कितना बदल चुका है..!

न नूर है न नज़र ही अब , न काया है न माया ।

यादें ही है अब,

न मैं वो हूं , न मेरा वो साया ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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