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हम में भी रहा था नूर कभी


 हम में भी रहा था नूर कभी ,

आज फीका फीका सा है , तो क्या ?

अब भी हम ,
अंधेरों को ज़ब्त , करने की औकात रखते है ।

✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी 💫✨️🌟

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