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काश के वो जो उसके नसीब का है , मेरे नसीब का होता ।

काश के वो जो उसके नसीब का है , मेरे नसीब का होता ।

मैं भी उसको अपनी बाहों में भरता , और जी भर उसे चूम लेता ।

हो जाती रोशनई उनकी काजल की , और मेरे लबों की कलम ।

लिख देता तकदीर मोहब्बत की , दिल में मैं उनके ।

काश के वो जो उसके नसीब का है , मेरे नसीब का होता ।

अश्क ए दरिया हुआ है वक्त के हाथों ।

काश वक्त उनके नसीब का है जो , वो मेरा नसीब का होता ।

मैं भी उसको अपनी बाहों में भरता , और जी भर उसे चूम लेता ।

आए न ख्वाब भी कभी उनके , और मैं तरस रहा क्यों ?

बेगाने है वो फिर , अपने से लगते है वो क्यों ?

काश वो आकर हमें  यह बता देता ।

इसी बहाने उन्हें जी भर मैं देख लेता ।

काश वक्त उनके नसीब का है जो , वो मेरा नसीब का होता ।

काश के वो जो उसके नसीब का है , मेरे नसीब का होता ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी


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