पिता उम्मीद है , अहसास है।
पिता नन्हे से बच्चे, की शान है।
पिता ने जो सिखाया, वही कर्म है।
पिता ने जो समझाया, वही धर्म है।
पिता है तो, सब सपने साकार है।
उनके बिना, सब कुछ बेकार है।
पिता से ही जीवन है, संस्कार है।
पिता ही, भगवान् का अवतार है।
✍️सांभर: विकास रतूड़ी
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