इन हवाओं से , इन फ़िज़ाओं से ।
खुश्बू तेरी , आ रही है ।
आ जा अजा रे ,मुझको ।
याद तेरी , आ रही है ।
इन बहारों की मस्ती ,
देख दिल मचलाया है ।
देखु फिर मैं , ख्वाब तेरे ।
दिन रैन यूँ बिताया है ।
आजा आजा रे , मुझको ।
याद तेरी , सता रही है ।
दिल मे हो , तुम दिलदार मेरे ।
तुम दर्पण , नैनों के मेरे ।
छवि तुम्हारी बसी है इसमें ,
जैसे प्राण बसे हो जीवन में ।
आ जा अजा रे ...
✍️ज्योति प्रसाद
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