हमें ख्याल ही नही रहा कि :
थक गई है कलम अब ,
इसमें वो बात कहां ।
ढल कर निखर जाए,
किसी के मन की किताब में ।
हुआ अहसास आज ,
जब पूछ लिया अचानक ,
हमने अपने दिल से ।
शायद ही कलम अब उठे ,
और कुछ लिखा जाए ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
हमें ख्याल ही नही रहा कि :
थक गई है कलम अब ,
इसमें वो बात कहां ।
ढल कर निखर जाए,
किसी के मन की किताब में ।
हुआ अहसास आज ,
जब पूछ लिया अचानक ,
हमने अपने दिल से ।
शायद ही कलम अब उठे ,
और कुछ लिखा जाए ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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