मेरी ख्वाबो के सफर की ,
तूम हमसफ़र हो मेरी ।
मेरे राह ए मोहब्बत की ,
हम नशीं हो तुम मेरी ।
सुन अफसाना , मेरे ख्वाबों का ।
रहती है तू ही संग मेरे , हर रोज ।
मेरे ख़्वावों की दुल्हन बन कर ।
रहती है कभी तेरी तो ,
कभी मेरी गोद ,
इक दुझे का , सिरहाना बनकर ।
मेरी ख्वाबों के सफर की ,
तुम हमसफर हो मेरी ।
मोहब्बत कोई गुनाह नही ,
यह खुदा की दी हुई ,
पाक रहमत है ।
हो जाये जो किसी से तो ,
यह खुदा की रहमत है ।
मेरी ख्वाबो के सफर की ,
तूम हमसफ़र हो मेरी ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी ।
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