आज मेरा कल , फिर लौट कर आया ।
था वो ख्वाब ही , मगर आनंद बहुत आया ।
वही सुरूर वही उमंग ,
वही मस्ती भरे पल जो ,
थे कभी जवानी में ।
कब रात गुजारी , कुछ मालूम ही नही हुआ ।
ख्वाब टूटा , दिल फिर वहीं लौट आया , अपनी तन्हाइयों में ।
आज फिर मेरा कल लौट कर आया ,
था ख्वाब ही , मगर आनंद बहुत आया ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
अति सुंदर
जवाब देंहटाएंआपका हार्दिक धन्यवाद जी🙏
हटाएंआपका हार्दिक धन्यवाद जी🙏
हटाएं