चला गया तू , कभी न लौट आने के लिए ।
छोड़ गया तू , अपने निशान दिल में मेरे ,
अपनी यादें दिलाने के लिए ।
तेरे दम से रही मैं बे-फिक्र ,
तुझे देख कर करार आ जाता था ।
होती था जब कभी मैं उदास ,
तू मनाने आ जाता था ।
थी रौनक तेरे से मेरे आंगन में ,
वो बाहर तू ले गया ।
खुश रहे तू उस दुनिया में ,
अपनी यादें तू , मुझे उम्र भर दे गया ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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