सोच था इस मुकाम में ,
मुलाकात हो शायद ।
मगर कहाँ वक्त है ,
उनके पास हमारे लिए ।
पूछा भी था कई सवालात,
हमने उनसे ।
और उनके ,
तबियत ए हाल भी ।
शायद मुनासिब ,
न समझा होगा उन्हेंने ।
हमें कुछ , बतलाने की ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
सोच था इस मुकाम में ,
मुलाकात हो शायद ।
मगर कहाँ वक्त है ,
उनके पास हमारे लिए ।
पूछा भी था कई सवालात,
हमने उनसे ।
और उनके ,
तबियत ए हाल भी ।
शायद मुनासिब ,
न समझा होगा उन्हेंने ।
हमें कुछ , बतलाने की ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें