तेरी दोस्ती के दम पर हूं अब
जिया जाए जो चार दिन ।
मुझको देना साथ अपना यूं ही ,
मेरा हम राज बनकर ।
मेरी जिंदगी की किताब खुली है ,
कुछ नहीं रहा अब छुपाने को ।
उठ चुका भरोसा इस जहां से ,
कुछ न रहा अब निभाने को ।
दोस्त अब तेरा ही सहारा है ,
अपने टूटे दिल का हाल बतलाने को ।
रखना अपने प्यार का मरहम
मेरे जख्मी दिल सहलाने को ।
शायद भर जाए जख्म यह कभी ,
हकीम तुम जो बन जाओ मेरे
धड़क उठेगा दिल फिर ये,
तुम जो इसे सहराओगे ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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