मेरा दिल हो तुम , मेरी धड़कनों की आवाज़ हो ।
मेरे मन का गीत हो तुम , मेरे गीत का साज़ हो ।
दिल ने दिल को चाह ,दिल ने दिल से प्यार किया ।
भूल गए हम गम अपने सारे , तूने मुझे इतना प्यार दिया ।
दिल का बंधन प्रीत से ये , ये टूटेगा क्या ।
जन्मों का है ये साथ हमारा , ये भला छूटेगा क्या ।
मेरी आरजू हो तुम, मेरे दिल की चाहत हो तुम ।
कैसे जी लूंगा मैं तुम बिन, मेरे जीवन की रसधार हो तुम ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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