पहेली बनी है दर्द दिल का ,
ज़ख्म भरे तो सुलझाऊं ।
टूटा हुआ है तार दिल का ,
जुड़े तो कोई संगीत सुनाऊं ।
गैरों की खातिर मुस्कान है उनकी ,
मेरी खातिर अंगारे ।
धधक रही ज्वाला दिल में ,
हो शांत तो कोई दीप जलाऊं ।
पहेली बनी है दर्द दिल का ,
जख्म भरे तो सूलझाऊं ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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