आरजू है यही मेरी के , बनूँ चिराग मैं उनके दिल का ।
दामन में उनके सदा मैं , टीम टिमाऊँ
जुगुन की तरह ।
गर पड़े धीमी लौ इसकी ,
तो उनके प्यार का मैं तेल पाऊं ।
बसर हो जिंदगी कुछ इस तरह ,
उनके दिल में मैं बन्द रहूँ , सीप में मोती की तरह ।
✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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