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पसरा है कोरोना का कहर विश्व व्यापक ,गांव गांव शहर शहर ।

पसरा है कोरोना का कहर विश्व व्यापक , 

गांव गांव शहर शहर ।

मन बैठा जाता है ,

काल कैसा आया यह भयंकर ।

समशान सा पसरा सन्नाटा है ,चारों ओर ।

कैद हो गयी जिंदगी , जेब खाली है , 

राशन के है खाली ड्रम ।

मरे तो दोनों तरफ , 

यही सोच कर क्या हो गया ये , 

अब क्या होना है ।

जाए बाहर तो करोना है ।

रहे अंदर तो रोना है ।

चलो जो होगा देखा जाएगा , 

रहेंगे बंद घरों मे ही ।

 कोई न कोई हल तो आएगा ।

आज नही तो कल ही सही ,

करोना चला जाएगा ।

लौट आएगी फिर से जिंदगी ,

कुछ खो कर , मर्मरिक घाव दफन कर । 

चेहरे पर निशान आसुओं के देकर । 

पसरा है करोना का कहर , विश्व व्यापक , 

गांव गांव शहर शहर ।

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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