है नम मेरी पलकें के ,
तुम बहुत याद आ रही हो ।
दिल से निकल रही आहें ,
और छवि मन में ,
तेरी उभर रही है ।
कुछ तो लिखकर भेज के ,
यह बेचैनी मिट जाए ।
मेरे तड़पते दिल को ,
करार आ जाये ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
है नम मेरी पलकें के ,
तुम बहुत याद आ रही हो ।
दिल से निकल रही आहें ,
और छवि मन में ,
तेरी उभर रही है ।
कुछ तो लिखकर भेज के ,
यह बेचैनी मिट जाए ।
मेरे तड़पते दिल को ,
करार आ जाये ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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