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आये है यहां चार दिन और फिर लौट कर चले जाना है ।

आये हैं यहां, चार दिन और फिर ,
लौट कर इस दुनिया से ,चले जाना है ।

मिली खुशी तो खुशी है जिंदगी  ,
मिला गम तो, गम है जिंदगी  ।
बचपन है जिंदगी ,

जवानी और बुढ़ापा है जिंदगी ।
जिस हालात से गुजर हो ,
वो हालात है जिंदगी ।

बस...!
एक तू है जिंदगी,
और इक़ , मैं हूँ जिंदगी ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी


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थक गया हूं , फ़ज़ूल के इस सफर से ।

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