तू चांद है मेरा दिल का ,
चाहता तुझे भी मै बहुत हूं ।
छोड़ भी कैसे दूं मै सूरज को ,
वो उजाला है मेरे सवेरे का ।
ना रह सकता हू तेरे बिना ,
ना जी पाऊंगा उनके बिना ।
तू साज है तो वो ,
तराना मेरे जीवन का ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
तू चांद है मेरा दिल का ,
चाहता तुझे भी मै बहुत हूं ।
छोड़ भी कैसे दूं मै सूरज को ,
वो उजाला है मेरे सवेरे का ।
ना रह सकता हू तेरे बिना ,
ना जी पाऊंगा उनके बिना ।
तू साज है तो वो ,
तराना मेरे जीवन का ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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