रो लेंगे याद बनकर आएगी तू ,
मेरे अश्कों की कतारों में ।
दिल तड़प उठेगा कराह लेंगे ,
तन्हां ए नज़्म मेरी नाम तेरा होगा ,
थी मोहब्बत तू मेरी ,
और न दूजा कोई होगा ।
न खफा हूँ मैं तुझसे ऐ जिंदगी ,
बस हैरां हूँ मुकद्दर से ।
छोड़ चले वो आज हमें ,
जिन्हें चाह था हमने मुकद्दस से ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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