आज लोग किसके इशारों पे,
बे खोफ हुआ करते है ।
खेल रहे है जो अपनी ,
जान की बाजी हमारे लिए ,
उन्हीं को पीटा करते है ।
शर्म न हया रह गयी अब ,
न भाव इंसानियत का ।
उतार रहे है तस्बीर कैमरों में और ,
तमाशाई बन लोग गुमा करते है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
आज लोग किसके इशारों पे,
बे खोफ हुआ करते है ।
खेल रहे है जो अपनी ,
जान की बाजी हमारे लिए ,
उन्हीं को पीटा करते है ।
शर्म न हया रह गयी अब ,
न भाव इंसानियत का ।
उतार रहे है तस्बीर कैमरों में और ,
तमाशाई बन लोग गुमा करते है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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