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मत पिला तू इन आँखों से मुझे , शराब-ए मोहब्बत ।

मत पिला तू इन आँखों से मुझे , शराब-ए मोहब्बत ।

कहीं बहक न जाऊं मैं तेरे प्यार में ,

कुछ तो ख्याल कर पिलाने से पहले । 

कही सहारा न बन जाये  कंधा तेरा

मेरे सहारे के लिए ।

कहीं बहक न जाऊं में तेरे प्यार में ,

कुछ तो ख्याल कर पिलाने से पहले । 

मत पिला तू मुझे और शराब-ए मोहब्बत ,

अपनी इन आँखों से । 

कहीं मैं बेहोश न हो जाऊं इतना कि , 

तेरी गोद हो जाये सिरहाना मेरा , 

उम्र भर के लिए  ।

कहीं बहक न जाऊं मैं तेरे प्यार में ,

कुछ तो ख्याल कर पिलाने से पहले । 

कहीं तेरा अंचल ही न रह जाए बन कर ,

ओढ़नी मेरी ,उम्र भर के लिए ।

मत पिला तू इन आँखों से मुझे ,शराब-ए मोहब्बत ।

तेरे गेशुओं की गिरफ्त में कहीं ,

गिरफ्तार न हो जाऊं मैं त-उम्र ,

दिल के तेरे खूब सूरत , कैद-खाने के लिए ।

कहीं बहक न जाऊं मैं तेरे प्यार में ,

कुछ तो ख्याल कर पिलाने से पहले । 

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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