ला-ईलाज़ ए गम है , दिल बना है नासूर ।
जिंदगी जख्म और , दिए जाती है ।
न जाने कब , मेरे मालिक तू ।
भेजेगा फरमान , मेरी मौत का ।
इसी इंतज़ार में , "मेरी" ।
दिन और रात, गुजर जाती है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
ला-ईलाज़ ए गम है , दिल बना है नासूर ।
जिंदगी जख्म और , दिए जाती है ।
न जाने कब , मेरे मालिक तू ।
भेजेगा फरमान , मेरी मौत का ।
इसी इंतज़ार में , "मेरी" ।
दिन और रात, गुजर जाती है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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