जानते हो जब तुम कि ,
हमें मनाना नही आता ।
फिर क्यों तुम हमसे ,
रूठ जाते हो ।
सीख लेते तुमसे ,
गुर मनाने के मगर ,
हमें रूठना नही आता ।
फिर क्यों तुम हमसे ,
रूठ जाते हो ।
दिल से चाहते है हम तुम्हें ,
चलो यह झूठ ही सही ।
फिर दिल क्यों बे चैन होता है ,
तुम्हारी खामोशी पर ।
क्यों रो देता है ये दिल ,
जब इसे आँसू ,
छुपाना नही आता ।
जानते हो तुम हमें ,
मनाना नही आता. ..
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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