कब्जा है किसी और का ,
मगर जरूरत है यहां ,
रहन बसर , करने वाले की ।
हो पसंद तो ठहर जाओ ।
मुद्दतों से ये मकान खाली है ।
सदियों से ताक रही है ,
इसकी दीवारे , छत ,आंगन चौबारा ।
कोई आये तो एक बार यहां ,
फिर लौटने न दूंगा उसे दोबारा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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