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कर के वीरान मेरे दिल की महफ़िल को ।

कर के वीरान मेरे दिल की महफ़िल को । 

तन्हां हमें कर छोड़ दिया , हाय दिल तोड़ दिया मेरा दिल तोड़ दिया । 

मांगा क्या था हमने तुमसे , एक प्यार के सिवा । 

कसूर क्या था मेरा , मैं एक निर्धन ही तो था । 

बतला दे वो हरजाई , मेरे प्यार में थी और क्या कमी । 

जो तलास की है तुमने गैरों में खुशी , और वो हमने तुम्हें कभी न दी । 

कर के वीरान मेरे दिल की महफ़िल को । 

और तन्हा हमें कर छोड़ दिया , 

हाय दिल तोड़ दिया मेरा , दिल तोड़ दिया । 

जला है बाग मेरे दिल का , अब न कभी बहार आएगी  । 

न खिलेंगे फूल वो दिल के , न कभी कोई कली  अब मुस्कुराएगी । 

मैं खाक में अपने , दिल को मिला जाऊंगा । 

बजूद अपना दफन कर , न कभी फिर नज़र आऊंगा । 

रहे सलामत तू , नया जहां मुबारक हो तुम्हे ।

तेरी बज्म में  फिर अब मैं , न कभी लौट के आऊंगा । 

✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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