हो कभी हालात कि, मैं ग़ज़ल न लिख पाऊँ ।
मेरे मन की बात ,मेरे मन ही रह जाये । मेरी आँखों से , मेरी बेबसी पढ़ लेना ।रखना मुझे तू , अपने प्यार की छाओं में ।
आदत हमें जो है तेरी , मेरी आदत को , अपनी आदत बना लेना ।
हो जाऊं मैं बैचेन , और कुछ न कह सकूं ।
मेरे जज्बात मेरे ख्यालात, मेरे अश्कों में पहचान लेना ।
लेकर मुझे तुम अपनी बाहों में ,
मेरा सर तुम
अपनी उंगलियों से सहला देना ।
✍️ज्योति प्रसाद
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