जिंदगी क्या आजमाएगी तुझे ,
उसे तेरी हैसियत से , नहीं कोई भी वास्ता ।
जो खुद है परेशान अपने ही वजूद से दिल ,
जिंदगी, कैसे तुझे सताएगी ।
बन चुका हो नसीब खुद का ही ,
जिसका संग आंसुओ के ।
जिंदगी भला तुझे कैसे रुलाएगी ।
ये तो सिर्फ तुझसे तेरी, वफा चाहती है ऐ दिल ।
जिंदगी ,जो खुद ही घिरी हो ,अंजमस में ऐ दिल !
जिंदगी भला तुझे क्या आजमाएगी ।
है प्यार जिंदगी का, इक तरफा ही सही ,
मगर दिल को चाहता बहुत है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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