नव क्रांति का देखो ,
आज आगाज हुआ ।
शायद टूट गया है बांध सब्र का ,
नया इतिहास बनाने को ।
शंख नाद सहस्र मुख से ,
जय घोष गूंज उठा ।
बदल देंगे तस्वीर अब देश की ,
सनातन अब जाग उठा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
नव क्रांति का देखो ,
आज आगाज हुआ ।
शायद टूट गया है बांध सब्र का ,
नया इतिहास बनाने को ।
शंख नाद सहस्र मुख से ,
जय घोष गूंज उठा ।
बदल देंगे तस्वीर अब देश की ,
सनातन अब जाग उठा ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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