चला था खुशियों की तलास में ,
मेरा मुकद्दर भी मेरे साथ हो लिया ।
खुशियां तो मिली नही मगर ,
इक गम से रिश्ता और जोड़ लिया ।
इक नजर मेरी थी, इक नजर तेरी थी ।
आशाओं के समंदर में डूबी जो कश्ती ,
कोई और नही वो मेरे दिल की थी ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
चला था खुशियों की तलास में ,
मेरा मुकद्दर भी मेरे साथ हो लिया ।
खुशियां तो मिली नही मगर ,
इक गम से रिश्ता और जोड़ लिया ।
इक नजर मेरी थी, इक नजर तेरी थी ।
आशाओं के समंदर में डूबी जो कश्ती ,
कोई और नही वो मेरे दिल की थी ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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