बहुत सुंदर दिखती होगी तुम तब , जब पानी की बूंदे ।
बालों से होते हुए , तेरे चेहरे पर आते हुए चमकती होगी ।
भीगा हुआ बदन तेरा , चाँदनी में जैसे नहाया हुआ सा ।
चेहरे पर प्यारी सी , मुस्कान रहती होगी ।
मस्त अल्हड़ होकर तुम जब , बालों को छटकती होगी ।
बड़ा दिल काश वो , प्यारा नजारा होता होगा ।
मंद मंद मुस्कान लिए , दर्पण को जब निहारती होगी ।
होता होगा ख्याल प्रीतम का और , खुद से खुद शरमाती होगी ।
फिर कोई गीत मनभावन का , जब गुनगुनाती होगी ।
थिरकते होंगे कदम तुम्हारे ,मन सरगम संग बंदगी होती होगी ।
काश मैं होता मेहमान वो , तेरे दिल की महफ़िल का ,
मुझे फिर खुदा से , कोई शिकायत न होती ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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