लौट जाऊंगा , तेरे दर से मैं
कुछ देर तो और , ठहर तो लूं ।
मज़ा क्या फिर, तन्हाई का ।
जो तेरी याद में, रो न लूं ।
ग़म की तू , फिक्र न कर ।
बे सुमार है ,दामन में मेरे ।
एक और सही, तेरी जुदाई का ।
कुछ देर तुझे , और देख तो लूं ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
लौट जाऊंगा , तेरे दर से मैं
कुछ देर तो और , ठहर तो लूं ।
मज़ा क्या फिर, तन्हाई का ।
जो तेरी याद में, रो न लूं ।
ग़म की तू , फिक्र न कर ।
बे सुमार है ,दामन में मेरे ।
एक और सही, तेरी जुदाई का ।
कुछ देर तुझे , और देख तो लूं ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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