दर्द ए दिल अपना , दिखाऊँ किसे ।
कहाँ है वो , नज़र कहीं ।
जिसे मेरा , दर्द नज़र आये ।
भुला तो दिया था , हमनें उनको ।
जमानें , कई हुये ।
आज फिर वो हमें क्यों , रह-रह याद आये ।
है कहाँ वो , नज़र कहीं ।
जिसे मेरा दर्द ,नज़र आये ।
उम्मीदों की शायद , कोई किरण जगी हो ।
के दिख जाए वो , कहीं इक नज़र ।
फिर वो किरण , अभी तक ।
मुझे क्यों , न नज़र आये ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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