दिल से दिल मिले जब जहां ,
दोस्ती पक्की है वहाँ ।
विश्वास की डोर से , बंधे हो जो दामन ।
नही टूटते वो रिश्ते कभी वहाँ ।
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जीने की राह ,
खोज ली है अब मैंने ।
राह में फूल तो नही ,
मगर कांटे बे-सुमार है ।
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हम अपने उसूल न छोड़ सके ।
तुम अपने ज़िद्द न छोड़ सके ।
रहे अपने ही गरूर में हम ,
इक दूजे से दूर होते चले गए ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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