परिवर्तन स्वाभाविक है ।
जड़ चेतन कोई भी ,
इस प्रक्रिया से अछूता नही है ।
कोई रत्ती भर तो कोई पहाड़ सा ,
किन्तु बदला हर कोई है ।
तुम बदले हम बदले सब बदले ।
अचार विचार बदले ।
माया ममता बदली ,
करुणा दिल की बदली ।
समय बदला ,
देखने का नज़रिया बदला ।
आना जाना बदला ,
क्या क्या नही बदला ।
रिश्तों की मिठास बदली ,
दुश्मनी में ,कड़वाहट बदली ।
धरा ,अम्बर ,हवा पानी ,
सब तो बदले ।
क्या बचा है जो न बदला?
✍ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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