माता पिता से , बढ़कर कोई भी नही ।
मां धरती तो , पिता आसमान है ।
माँ ममता तो , पिता करुणा निधान है ।
पहला पाठ मां ने सिखया ,
बोलना चलना खाना सिखाया ।
पिता ने स्नहे से ,
कभी पीठ पर कभी गोदी में खिलाया ।
कभी फटकारा गलतियों पर , पिता ने ।
मां ने सदा मेरा पक्ष लिया ।
बैठा जो मैं दूर उदास होकर ,माँ-बाबा ने
फिर दुलार किया ।
नाज़ों से पाला पोषा है ,
और उम्मीदों से संसकार दिया ।
✍ज्यो०प्र० रतूड़ी
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