महक तेरे बदन की , मेरे साँसों में जिन्दा है ।
मेरी इन आँखों में , अक्स तेरा जिंदा है ।
मेरे दिल की धड़कनों में , नाम तेरा जिंदा है ।
कैसे तुझे भूल जाऊं मैं , ऐ मेरी जान ए वफ़ा ,
मेरे लहू के हर कतरे में ,तेरी मोहब्बत अभी जिंदा है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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