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मेरे भाव का अर्थ समझने की कोशिश करना ।

 मेरे भाव का अर्थ ,

समझने की कोशिश करना ।

 बेबाक़ होकर न कुछ कहना ।।


कुँवारे थे जब हम , 

किसी अजनबी को देखकर ।

आकर्षण हुआ ।।

 

दिल में कुछ उमंग कुछ तरंग सी ,

इक लहर सी छाई थी ।

सच मानो , मोहब्बत से बेखबर थे हम । 


मालूम नही किसे कहते है "इश्क" 

हाँ चाहत के दीवाने थे हम ।

बंद गए थे परिणय के , 

मधुर सूत्र बंधन में हम ।


मालूम हुआ है के अब ,

शायद वही रहा होगा "इश्क" 

और मोहब्बत अब ।

 

अब भी उनका ,

रुख ए रौशन गज़ब ढाह रहा है ।

इक अज़ीब सी कशिश है ,

अब भी उन में ।


शादीशुदा उम्र दराज़ हैं हम तो , क्या हुआ ।

"प्यार" अब भी हमारा , गजब ढाह रहा है ।


✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी ।


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