आरक्षण औषधि रूप में कर गयी काम ,
व्याधि अब स्वस्थ हो गए ।
अब तो विषाक्त हुआ जा रहा है ये ,
सनातन समाज में विखंडन का ।
कारक बनता जा रहा है ये ।
अभी तक सरकार नही कर रही ,
खत्म आरक्षण ।
बस यही तो रोना है , हम कोशिश पर है की जातिवाद खत्म हो ।
मगर क्या करें व्यवस्था में ही खोट बड़ा है ।
कैसे बने सनातनी एक , अभी भी हर के दिलों में ।
हरिजन दलित पिछड़ा स्वर्ण का विखंडन तुला ,
खूंटा गाड़े खड़ा है ।
प्रभु ! तुम ही करो ,अब कोई जतन ।
करो कोई चमत्कार ,हो जाएं जो हर एक ।
सनातनी एक जुट ,करो हृदय परिवर्तन ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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