लिखेगी क्या ? कलम तू ,
दास्ताँ मेरी जिंदगी का ।
उम्र भर रहे आँसू ,
मेहमाँ मेरी जिंदगी का ।
हसरतें तो बहुत थी मगर ,
नशीब अगर साथ होता ।
इस शम-ए-फ़रोज़ाँ की ,
महफ़िल में ।
कोई तरन्नुम ,
मेरी जींदगी का होता ।
लिखेगी क्या ? कलाम तू ,
दास्ताँ मेरी जिंदगी का ।
उम्र भर रहे आँसू ,
मेहमाँ मेरी जिंदगी का ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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