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ज्याणी कुज्याणी , कख लीक जाली तेरी मेरी या माया रे (गढ़वाली प्रेम गीत)

ज्याणी कुज्याणी , कख लीक जाली तेरी मेरी या माया रे हे भग्यानी ! तेरी मेरी या माया रे । 
हियूं जनु होलु प्राण , या रूढ़ियों कु घाम रे , 
ज्वान जानी चमकली या माया , या दोफरा का घाम रे , हे भग्यानी या दोफरा का घाम रे । 
ज्याणी कुज्याणी , कख लीक जाली तेरी मेरी या माया रे हे भग्यानी ! तेरी मेरी या माया रे । 
नि होन्दू मन मेरु उदास , पाई जबसी त्यरू साथ । तेरी माया मु है लठ्यली रे , खांदू मैयी भौत सारू रे है भग्यानी ! भौत सारू रे । 
मन मेरु नि रंदु मेरा गैल , सुर बुट कब जैक खलकी जांदू यूँ प्राणी तेरा गैल रे , रे भग्यानी !
तेरा गैल रे । 
खोज्दा फिरदु रंदों मैयी अफसणी , धारू धारू रे , हे भग्यानी ! धारू धारू रे । 
ज्याणी कुज्याणी , कख लीक जाली तेरी मेरी या माया रे , हे भग्यानी !तेरी मेरी या माया रे । 
तेरा मनै की जाण दूँ नि मैं , पर होली किलै न इछि , माया धैरि , म्यारा बाँठा की रे , मेरी गेल्याणी ! म्यारा बाँठा की रे । 
कब तलक राली तू , माया अपणी छुपे कि रे , माया आपणी छुपे की रे , हे भाग्यनी ! माया अपनी छुपे की रे । 
इक दिन बरखलु सौण , कंठ भोरी आलू उमाल रे , हे भग्यानी !आलू उमाल रे । 
लगलु जब बसगाल मन मा , दणमण तब आँखियों मा तेरा रे , म्यारा खुदा कु रे , है भाग्यनी ! मेरा खुदा कुरे । 
ज्याणी कुज्याणी , कख लीक जाली तेरी मेरी या माया रे ,हे भग्यानी ! तेरी मेरी या माया रे ।
✍️ ज्योति प्रसाद रतूड़ी

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