गम ए समंदर तैर कर , पार कर तो लूँ मगर ।
अगर मिले साहिल , मुझे तेरे प्यार का ।
जब तक न सहराओगे तुम हमें ,
हम यूँ ही गम ए सफर करते जाएंगे ।
कभी तो मिलेगा हमें किनारा तेरी मोहब्बत का ।
नही उतरेंगे किसी और किनारे पर ,
तेरे सिवा ।
नही जचता साहिल कोई और हमें , मोहब्बत का ।
होगा पाना मुश्किल तुम्हें तो मझधार में ही ,
डूब कर मर जाएंगे है ।
गम ए समंदर तैर कर , पार कर तो लूँ मगर ।
अगर मिले साहिल , मुझे तेरे प्यार का ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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