मत पूछो कल रात , तमाशा कुछ ऐसा हो गया ।
मैं जल्दी रात , आठ बजे ही सो गया ।।
मां-बाबू जी को कुछ , समझ ना आया ।
आनन फानन , पड़ोसियों को भी बुलाया ।।
देखो देखो लल्ला को , यह क्या हो गया ।
लगता है बेटा हमारा , कोमा में हो गया ।।
ये तो दो-तीन बजे , रात तक जागता था ।
आज लल्ला हमारा , जल्दी कैसे सो गया ।।
अम्मा के आंसू रोके न रुके ,
रो रो कर बुरा हाल हो गया ।
मैं न जाने कैसे इतनी ,
गहरी नींद में सो गया ।
बाबू जी ने जोर का मारा चांटा ,
"उठ बे कुंभकर्ण"
मैं उठा घबराया हुआ ,देखा तो ।
गाल मेरा , लाल हो गया ।।
फिर प्यार से तब , अम्मा बोली ।
लल्ला ये तुम्हें आज , क्या हो गया ।।
ए री अम्मा करता क्या , सोता ही ,
मेरा जब डाटा पैक ही , खत्म हो गया ।
मत पूछो कल रात , तमाशा कुछ ऐसा हो गया ।।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
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