सिमटी हुई ये घड़ियां ।
ना जाने क्या..........कर जाए ।
वो हमें याद आएं और यादों में ।
न जाने क्या...........कर जाए ।
सिमटी हुई ये घड़ियां ।
ना जाने...........क्या कर जाए ।
वो आएं क्या ख्वाब बनकर , क्या हम ।
आंखे बंद........कर जाएं ।
सिमटी हुई ये घड़ियां ।
ना जाने.........क्या कर जाए ।
दिल में है क्या हमारे , ये उन्हें हम ।
अब......... कैसे बताएं ।
हुए थे जुदा हम , सकून ए दिल की खातिर ।
मिला दर्द और जियादा , दर्द वो अपना ।
हम उन्हें अब.........कैसे बताएं ।
सिमटी हुई ये घड़ियां ।
ना जाने.............क्या कर जाए ।
हाय ये रात का सूनापन , ये दिल की खामोशियाँ ।
उनका ख्याल , और ये ।
अश्कों की............बहती धाराएं ।
कैसे हम , किसी से अब ।
अपना.............गम छिपाएं ।
सिमटी हुई ये घड़ियां ।
ना जाने.............क्या कर जाए ।
वो आएं क्या ख्वाब बनकर , क्या हम ।
आंखे बंद.......कर जाएं ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी ।
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