जो गुजरा हो उस मुकाम से, "दर्द"
क्या और खुशी क्या ।
हर एहसास वो , दिल का जानते है ।
लिखे जा तू , फसाना अपने दिल का ।
पढ़ने वाले बहुत है,
जो दिल के अल्फ़ाज़ पहचानते है ।
तुम अकेले नही , हम भी राह ए गुजर है ।
उस राह के , जिस राह से है गुजर तेरी ।
होता क्या है एहसास ,
पाने से किसी की "मोहब्बत"
हाल ए दिल पर क्या गुजरती है ,"दर्द"
किसी के खो जाने से ।
यह हम बा-खूब जानते है ।
लिखे जा तू , फसाना अपने दिल का ।
पढ़ने वाले बहुत है,
जो दिल के अल्फ़ाज़ पहचानते है ।
✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें